Thursday, April 25, 2013

जीवन


जीवन



ये सत्य सुरभित सा जीवन
मंगल विनोद की कांति लिए
जग के प्रस्तर खंड पर
जीवन के दर्शन पर
मिथ्या कल्पित अभिलाषाओ पर
प्रतिक्षाओ के युग से
प्रतिक्षाओ के युग तक
एकांकी निरीह स्वप्न गत्वा
ये सत्य सुरभित सा जीवन
मंगल विनोद की कांति लिए

-अनुज डिमरी

No comments:

Post a Comment