Thursday, April 25, 2013

वियोग का प्राकृतिक सौन्दर्य

वियोग का प्राकृतिक सौन्दर्य

गरज बरस घनघोर घटा
पुलकित हृदय उद्वेलित धरा
आज प्रलय की घड़ी है
ये आँधी सामने खड़ी है
अभी द्वंद्ध की राणभेरिया
बज उठी है
अभी जवानी शेष पड़ी है
आज प्रलय की घड़ी है
दादुर तेरी करुण पुकार
विरह व्यथा को करती साकार
हे ऋतु वसंत ऋतुराज
ये घनघोर घटा आज
करती चपला सा प्रहार
आज प्रलय की घड़ी है
                                  -अनुज डिमरी

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