Thursday, April 25, 2013

विश्वास

विश्वास


ये क्षण भंगुर सा विश्वास
देता मुझे यह अहसास
कल वसंत आयेगा
जीवन का सौरभ बिखराएगा
देगा कपोल कल्पनाओं को
नव आधार
फिर उन्मुक्त कंठ  से
सृजन  के गीत गायेगा
ये क्षण भंगुर सा विश्वास
आज बैठा मेरे पास
आह कितना आहात
आह कितना व्यातुर
कुछ विचलित सा
कुछ सयमित सा
दे रहा यह संदेश
आज कोई व्यथा के
द्वार खोलेगा
अर्द्ध खुले नेत्रों से
नव जीवन के स्वप्न सजोएगा
देगा कपोल कल्पनाओ को
नव आधार
फिर उन्मुक्त कंठ से
सृजन  के गीत गाएगा
ये क्षण भंगुर सा विश्वास
आज बैठा मेरे पास
                             
                                -अनुज डिमरी

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