एक गुलाम जो लड़ रहा था ...
एक गुलाम जो लड़ रहा था
व्यवस्था परिवर्तन के लिए
साधारण इच्छा और आकांक्षा लिए
मरणाशन अवस्था में
समाज को जागृत करने के लिए
अनुभूति और आकांक्षा
के समुद्र में गोता लगाता
वह लड़ रहा था
नव परिवर्तन के लिए
भविष्य कल्पना से बेहतर होगा
नव संसार की फिर संरचना होगी
बदली व्यवस्था मे नया दृष्टि भ्रम होगा
नया साम्राज्य नया शासक होगा
कर्म पर अधीनता का बोझ नहीं होगा
कर्म अपने उद्देश्य को
स्वयं फलीभूत करेगा
आदर्श पर मौन संकेत करेगा
हम पशुवृत्ति के व्यवहार से
बाहर आकर नव चिंतन मे लीन होंगे
अधरों पर रस मलय की
कल्पना अनुनादित होगी
नव स्वर मे नव जाग्रति होगी
एक गुलाम जो लड़ रहा था।
अनुज डिमरी
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