पानी की बूंदें
ये टप टप बुंदों का कलरव
एक अवचेतन मन उद्धभव
स्वर मंगल नव मुखरित संगीतमय
प्रजनन की वेदना से
कंटको के मध्य से
जीवन वृक्ष के गर्भ से
अहल्लादित मन से
शोभायमान है
मन मस्तिष्क पर
सम्राटों के सिंहासन से
रंको दे प्रागण तक
अहल्लादित धरा की
उत्कंठा मे जीवन भरता
ये टप टप बुंदों का कलरव
सत्य स्वप्न सा उद्धभव
निधि संचित नश्वर
जीवन मे
संग्रहीत है अवचेतन मन मे
सजग प्रहरी एकांत का
ये टप टप बुंदों का कलरव
No comments:
Post a Comment